Tuesday, June 18, 2013

मूसलाधार बारिश से नदियां उफनीं

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36 घंटों से हो रही मूसलाधार वर्षा से सीमांत जिले के सीमांत क्षेत्र में जनजीवन अस्त व्यस्त हो चला है। हिमनदों से निकलने वाली काली, गोरी, धौली, मंदाकिनी और रामगंगा नदियां खतरे के निशान को पार कर चुकी हैं। सभी नदियों के किनारे स्थित बस्तियों को अलर्ट कर दिया गया है। कुछ स्थान पर ग्रामीण गांव छोड़ चुके हैं।
पिथौरागढ़ जिले में पिछले 36 घंटों से लगातार वर्षा जारी है। उच्च हिमालयी भू भाग में वर्षा का दौर निचले स्थानों से अधिक है। फलस्वरूप वहां पर वर्षा से सीजनल ग्लेशियरों के पिघलने और वर्षा के चलते ग्लेशियरों से निकलने वाली काली नदी, गोरीगंगा, धौलीगंगा, मंदाकिनी और रामगंगा उफान पर पहुंच चुकी हैं। धारचूला से लेकर झूलाघाट तक काली नदी रौद्र रूप धारण कर चुकी है। जौलजीवी में गोरी नदी का पानी बस्ती तक पहुंच चुका है। गोरी नदी का पानी बचाव के लिए बनी लगभग 15 फिट ऊंची दीवार पार कर बस्ती तक पहुंच चुका है। कई घरों में पानी घुसने लगा है। कई लोगों ने घर छोड़ दिए हैं। बस्ती में दहशत का माहौल है।
मदकोट में गोरी नदी के उफान पर आने के कारण एनएचपीसी द्वारा गोरीगंगा परियोजना के लिए नदी किनारे से पंद्रह फिट ऊंचाई पर स्थापित प्लेटफार्म पर रखीं मशीनें पानी में डूब चुकी हैं। नदी किनारे टेंट बह चुके हैं। फगुवाबगड़ के पास गोरी नदी ने दस मीटर मार्ग लील लिया है। नदी अब सड़क से लगभग दस फीट ऊपर तक बह रही है। मल्ला मदकोट के दो दर्जन परिवार नदी द्वारा किए जा रहे कटाव को देखते घर छोड़ चुके हैं। बंसतकोट के पास झूला पुल बह चुका है। गोरी नदी का बहाव भदेली की तरफ होने से भदेली गांव को खतरा पैदा हो गया है। सेराघाट में ग्रिफ द्वारा निर्माणाधीन पुल तक नदी का पानी पहुंच चुका है। उधर गर्जिया नामक स्थान पर झूलापुल तक पानी पहुंच चुका है।
धारचूला की दारमा घाटी में धौलीगंगा नदी विकराल रूप ले चुकी है। दारमा मार्ग में तीन पुल बह गए हैं। कैलास मानसरोवर यात्रा मार्ग एवं नारायणआश्रम मार्ग पर कंचौती मोटर पुल खतरे में आ चुका है। यहां पर रहने वाले परिवारों ने मकान छोड़ दिए हैं। दारमा घाटी में धौली नदी पर बने तीन पुल बह चुके हैं। नामिक ग्लेशियर से निकलने वाली रामगंगा नदी भी ऊफान पर है। नदी में कई मृत जानवर बहते नजर आए। नदियों का पानी पूरी तरफ मटमैला हो चुका है। झूलाघाट में भी काली नदी का विकराल रूप देखने को मिल रहा है।
उल्लेखनीय है भारी वर्षा के बाद अभी तक बरसाती नदी नालों का जल स्तर नहीं बढ़ा है, मात्र उच्च हिमालयी क्षेत्र से निकलने वाली नदियां ही ऊफान पर हैं। जानकारों का मानना है इस बार भारी हिमपात के चलते अभी तक ग्लेशियर पूरी तरह नहीं पिघले थे। इधर वर्षा के कारण ग्लेशियरों के पिघलने से नदियों का जल स्तर तेजी से बढ़ रहा है।

Source: http://www.jagran.com/uttarakhand/pithoragarh-10484935.html
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पहाड़ों पर आफत की बरसात अब तक 68 की मौत

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मानसून की वक्त से पहले दस्तक पहाड़ों पर कहर बरपा रही है। उत्तराखंड और हिमाचल में भारी बारिश से सोमवार को हालात बेहद बिगड़ गए। बाढ़ और बारिश से उत्तराखंड में 40, हिमाचल में 10 और यूपी के सहारनपुर में 18 लोगों की मौत हो चुकी है। हालांकि आशंका जताई जा रही है कि मरने वालों की संख्या इससे ज्यादा हो सकती है।
चारधाम यात्रा के विभिन्न पड़ावों और धामों में 68 हजार यात्री फंसे हुए हैं। चारधाम के बाद कैलाश मानसरोवर यात्रा भी रोक दी गई है। उत्तरकाशी से लेकर हरिद्वार और कुमाऊं तक की तमाम नदियां उफान पर हैं। सैकड़ों मकान-दुकान, होटल व गाड़ियां उफनती नदियों की भेंट चढ़ गए हैं। हरिद्वार में गंगा खतरे के निशान से दो मीटर ऊपर बह रही है। बेकाबू हालात से निपटने के लिए उत्तराखंड सरकार ने सेना, आईटीबीपी की मदद मांगी है। सेना के 14 हेलीकॉप्टर तैयार हैं।
यूपी में सरसावां और बरेली को बेस बनाया गया है। देहरादून पहुंची राष्ट्रीय आपदा राहत बल (एनडीआरएफ) की टीम खराब मौसम के कारण आगे नहीं बढ़ पा रही है। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने स्वीकार किया कि स्थिति बदतर है। लोक निर्माण विभाग के मुताबिक उत्तराखंड में 450 सड़कें क्षतिग्रस्त हो गई हैं।
मौसम केंद्र निदेशक आनंद शर्मा ने बताया कि मंगलवार शाम के बाद मौसम में कुछ हद तक सुधार की संभावना है।
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मलबा आने से दो बसें खाई में गिरी

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लगातार हो रही बारिश से पहाड़ में भारी तबाही हुई है। दिल्ली से लौट रही रोडवेज की दो बसें धौलछीना के पास खाई में गिर गई। एक बस से चार शव और 20 घायलों को निकाला गया है। जगह-जगह मार्ग अवरुद्ध होने से बचाव दल मौके पर नहीं पहुंच सका था।
शनिवार रात से लगातार हो रही बारिश के चलते पहाड़ के अधिकांश रास्ते मलबा आने से बंद हो गए हैं। सोमवार सुबह दिल्ली से धारचूला और गंगोलीहाट जा रही रोडवेज की दो बसें अल्मोड़ा जिले के सेराघाट क्षेत्र में कसाड बैंड के पास मलबा गिर जाने से खाई में गिर गई।
धारचूला वाली बस बीस में पहाड़ी से लटककर रह गई, जबकि गंगोलीहाट वाली बस खाई में चली गई। धारचूला वाली बस में सवार यात्रियों को आसपास मौजूद लोगों ने जैसे-तैसे निकाल लिया। इन यात्रियों को पास ही स्थित सरकारी स्कूल में रोका गया है।
धारचूला वाली बस के परखच्चे उड़ गए। पूर्वाह्न 11 बजे तक उसमें से चार शव और बीस घायलों को बाहर निकाला जा सका था। जगह-जगह मार्ग अवरुद्ध होने से बचाव टीमें मौके पर नहीं पहुंच सकी थी।

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Saturday, March 23, 2013

कुमाँऊनी होली: गीत-संगीत और रंगों का त्‍यौहार

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कुमाऊंनी होली की विशिष्टता एक संगीत मामला है, जो भी अपने फार्म हो सकता है, यह हो सकता है Baithki होली, खारी होली या महिला होली में किया जा रहा है. Baithki होली और खारी होली कि गाने जिस पर वे आधारित हैं राग मज़ा, और अध्यात्मवाद के स्पर्श में अद्वितीय हैं. इन गीतों को अनिवार्य रूप से शास्त्रीय रागों पर आधारित हैं. कोई आश्चर्य नहीं कि तो Baithki होली निर्वाण की होली के रूप में भी जाना जाता है.

Baithki होली मंदिरों, जहां Holiyars (होली गीतों में से एक पेशेवर गायक) के रूप में भी लोगों को शास्त्रीय संगीत की संगत के लिए गीत गाते हैं इकट्ठा के परिसर से शुरू होता है.

कुमाउनी के लिए समय बहुत विशेष है  की कौन सा गाना कब गाना है, उदाहरण के लिए, दोपहर में Peelu, Bhimpalasi और सारंग रागों पर आधारित गीत गाए जाते हैं जबकि शाम कल्याण Shyamkalyan, और यमन आदि जैसे रागों पर आधारित गीतों के लिए  समय है

खारी होली ज्यादातर कुमाऊं के ग्रामीण क्षेत्रों में मनाया जाता है. लोगों को, जो खेल पारंपरिक सफेद चूड़ीदार payajama और कुर्ता, समूहों में जातीय संगीत वाद्ययंत्र की धुन पर नृत्य से खारी होली के गीत गाए जाते हैं.

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